Story of Kevat

सोचहुँ केवट भाग बड़ाई ।
सब बिधि हीन दीन अति ताको, राम लिहेउ अपनाई ।।
मीत पुनीत किये रघुनायक, भेटेउ कंठ लगाई ।
शिव अज मुनि सब जेहि चरनन, हित करते कोटि उपाई ।।
केवट धोए सोइ पद पंकज, सुर दुर्लभ सुख पाई ।
दीन मलीन पे सहजहिं रीझैं, करुनानिधि रघुराई ।।
वेद पुरान साधु सुर गावत, दीनन को सुखदाई ।
धीर धरै संतोष समुझि मन, कबहुँ दया तो आई ।

kevat

Kevat was a devot Ram bhakt and his devotion was limitless

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